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Indian Geography - Complete Notes Of Indian Geography Part 03 - Indian Geography UPSC Notes Topic Wise

Indian Geography - Complete Notes Of Indian Geography Part 03 - Indian Geography UPSC Notes Topic Wise

भारतीय भूगोल नोट्स भाग 03
नमस्ते दोस्तो कैसे है आपलोग मुझे आशा है कि आपलोग अच्छे होंगे। दोस्तो आज हम भारतीय भूगोल (Indian Geography) नोट्स भाग 03 को देखने वाले है। जैसा कि आप जानते हैं हम भारतीय भूगोल नोट्स सीरीज को शुरू किये हुए है जिसमें हम भारतीय भूगोल (Indian Geography) से जीतने भी महत्वपूर्ण प्रश्न बन सकते है उन सबका नोट्स हम आपको देने वाले है। अगर आप किसी भी प्रतियोगी परीक्षा जैसे कि SSC, CGL, MTS, CHSL, GD, CET, UP TET, RRB, BPSC, DELHI POLICE, MPPCS, BSSC, RPF, आदि सभी के लिए काफी महत्वपूर्ण होने वाला है। 

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Indian Geography - Complete Notes Of Indian Geography :

दोस्तो आज के पोस्ट में हम आपके सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण भारतीय भूगोल (Indian Geography) का नोट्स देने वाले है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि अगर आप इस पोस्ट को पूरा पढ़ लेते है तो दोबारा भारतीय भूगोल (Indian Geography) पढ़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस पोस्ट में हम आपके लिए संपूर्ण भारतीय भूगोल (Indian Geography) का नोट्स देने वाले है जो सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है। 

                     भारत की मिट्टी                        

मृदा (Soil) :

मृदा भूमि की ऊपर पाई जानेवाली दानेदार परत हैं जिसका निर्माण मूलरूप से चट्टानों के विखंडित होने उनमें वनस्पति व जीवों के सड़ने, गलने तथा जलवायु की क्रिया से निर्मित अम्लीय पदार्थों से लाखों वर्षों की प्रक्रिया के बाद मृदा का रूप लेती हैं। मिट्टी का अध्ययन के विज्ञान को मृदा विज्ञान (Pedology) कहा जाता है।

भारत की मिट्टी 

भारत में प्रमुख मिट्टी के प्रकार हैं  -

1. जलोढ़ मिट्टी      2. काली मिट्टी     3. लाल मिट्टी 

4. लेटेराइट मिट्टी   5. पर्वतीय मिट्टी   6. दलदली मिट्टी 

7. मरुस्थलीय मिट्टी  8. लवणीय मिट्टी 

भारत में सबसे अधिक क्षेत्रफल पर पाए जाने वाले मिट्टी चार प्रकार की होती है-

1. जलोढ़ मिट्टी   2. काली मिट्टी  3. लाल मिट्टी 

4. लेटेराइट मिट्टी

1. जलोढ़ मिट्टी - 

इसे दोमट मिट्टी और कछारी मिट्टी कहते हैं। जलोढ़ मिट्टी नदियों द्वारा पहाड़ी क्षेत्र से लाकर मैदानी क्षेत्रों में बिछा दी जाती है। जलोढ़ मिट्टी भारत में पाये जाने वाली सर्वाधिक उपजाऊ मिट्टी है। यह 43% क्षेत्र पर पायी जाती है ये नदी वाले क्षेत्र में देखी जाती है इसका विस्तार उत्तर भारत में है जब जलोद में बहुत कम मात्रा में बालू हो तो उसे कॉप कहते हैं जब जलोढ़ में अधिक मात्रा में बालू मिल जाता है। तो उसे दोमट कहते हैं। ये मिट्टी धान की खेती के लिए काफी अच्छी मानी जाती है तथा साथ ही गेहूं, मक्का, तेलहन, आलू की खेती की जाती है। जलोढ़ मिट्टी दो प्रकार की होती है - (a) बांगर तथा (b) खादर ।

● क्षेत्र - भारत का सम्पूर्ण उत्तरी मैदान और पश्चिमी तटीय मैदान।

● प्रचुरता - चूना पत्थर तथा पोटेशियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

● कमी - नाइट्रोजन, फास्फोरस तथा ह्यूमस की कमी है।

2. लाल मिट्टी -

लाल मिट्टी प्रायद्वीपीय भारत के कम वर्षा वाले क्षेत्रों में पायी जाती है। इस मिट्टी का रंग लाल फेरिक ऑक्साइड के उपस्थिति के कारण होता है। इसमें खनिज अधि क पाये जाते हैं। इस मिट्टी में लोहा और सिलिका की अधिकता होती है। किन्तु यह खेती के लिए के लिए अच्छी नहीं है। यह मिट्टी तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, नागालैण्ड, महाराष्ट्र, कर्नाटक के कुछ भाग में पायी जाती है। सबसे ज्यादा इसका विस्तार तमिलनाडु एवं आंध्रप्रदेश में देखने को मिलता है। यह मिट्टी बाजरे की खेती के लिए उपयुक्त होती है। जब लाल मिट्टी जल सोख लेती है यानि कि जलयोजीत रूप में होती है जब यह पीली दिखाई पड़ती है। ये 18% क्षेत्र पर पाए जाते हैं।

3. काली मिट्टी - 

इसका निर्माण बेसाल्ट चट्टानों के टूटने फूटने से होता है। इसे लावा निर्मित मिट्टी कहते है। इसमें सर्वाधिक मात्रा में ह्यूमस होता है यह मिट्टी सबसे ज्यादा जल सोखती है। काली मिट्टी को रेगुर मिट्टी, कपास की मिट्टी और लावा मिट्टी भी कहते हैं। इस मिट्टी का काला रंग 'टिटेनीफेरस मैग्नेटाइट' की उपस्थिति के कारण होता है। यह कपास तथा गन्ना के उत्पादन के लिए अच्छी है यह 13% क्षेत्र पर पाया जाता है।

क्षेत्र - मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तरी कर्नाटक प्रायद्वीपीय भारत में काली मिट्टी सबसे ज्यादा पायी जाती है। काली मिट्टी का सबसे ज्यादा विस्तार महाराष्ट्र में देखने को मिलता है।

4. लेटेराइट मिट्टी -

यह मिट्टी उस क्षेत्र में पायी जाती है जहाँ पर 200 सेंटीमीटर से अधिक वर्षा होती है और अत्यधिक गर्मी पड़े। इसे मखमली मिट्टी भी कहते हैं। इसका निर्माण निच्छालन (Ltching) द्वारा होती है इस विधि में तेज वर्षा के कारण मिट्टी के छोटे-छोटे कण भूमि के अंदर घूस जाते हैं। जिसमें यह भूमि ऊपर से पथरिली दिखती है। इस मिट्टी में लौह-ऑक्साइड एवं एल्युमिनियम की भरपूर मात्रा होती है। लौह-ऑक्साइड के कारण ही इस मिट्टी का रंग लाला होता है। यह मिट्टी मुख्यत: केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में और उड़ीसा, मेघालय, असम की कुछ हिस्सों में पायी जाती है। यह काजू, मसाला, काफी, इलाइची तथा भवनों के ईंट बनाने के लिए अच्छी है इसका सर्वाधिक विस्तार केरल है। जिस कारण इसे मसालों का राज्य कहते हैं।

5. पर्वतीय मिट्टी -

इस प्रकार की मृदा का विस्तार पर्वतों पर देखने पर मिलता है। जहाँ पर हिमालय पर्वत का विस्तार है. वहीं इस प्रकार की मिट्टी पायी जाती है। पर्वतीय का विस्तार जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, सिक्किम , अरुणाचल प्रदेश में देखने को मिलता है। यह अत्यधिक कठोर होती है जिस कारण वनस्पती का अभाव होती है यहाँ जंगली झाड़ियाँ होती है और अल्पाइन वृक्ष पाया जाता है। यह भारत के उत्तरी पर्वतीय क्षेत्र में पाये जाते हैं। पर्वतीय ढालों पर सेब, नाशपाती, चाय की खेती की जाती है।

6. दलदली मृदा - 

दलदली मृदा का विकास अत्यधिक वर्षा और वनस्पतियों के सड़ने के कारण होता है। दलदली मृदा में ह्यूमस की मात्रा अधिक होती है। दलदली मृदा का विस्तार मुख्यत: केरल, उत्तराखण्ड और पश्चिम बंगाल के कुछ क्षेत्रों में देखने को मिलता है।

7. मरुस्थलीय/बलुई मिट्टी -

इस प्रकार की मृदा में नमी की कमी होती है। इसकी जल सोखने की क्षमता सबसे कम होती है। इसका विस्तार भारत में मुख्यतः राजस्थान, गुजरात, दक्षिण पंजाब और दक्षिण हरियाणा में देखने को मिलता है। मरुस्थलीय भूमि होने के कारण यहाँ पर खाद्यान्न उगना संभव नहीं है। पर मोटा अनाज जैसे-बाजरा, ज्वार और सरसो की खेती की जाती है। इस मिट्टी में खजूर, नागफनी बवूल तथा कटीली झाड़िया होती है।

8. लवणीय मृदा -

जब मिट्टी की प्रकृति क्षारीय होती है और उसमें नमक की मात्रा बढ़ जाती है तो उसे लवणीय मृदा कहते हैं। लवणीय मृदा को रेड, कल्लर, ऊसर मिट्टी के नाम से भी जाना जाता है। भारत में इस मिट्टी का सबसे ज्यादा विस्तार गुजरातके कच्छ के रण में देखने को मिलता है। मुख्यत: फसलों उगाने के लिए भूमि का Ph 6 से 7.5 की मध्य होनी चाहिए।

9. अम्लीय मृदा -

यह खेती के लिए अच्छी नहीं होती है मिट्टी में अम्लीयता को कम करने के लिए चूने का उपयोग किया जाता है।

10. क्षारीय मृदा - 

यह भी खेती के लिए अच्छी नहीं होती है। मिट्टी में क्षारीयता को कम करने के लिए जिप्सम का उपयोग किया जाता है।

                    भारत की नदियाँ                        


भारत में नदियों की कमी नहीं है, जिसमें से कुछ ऐसी प्रमुख नदियाँ है जिनसे हर साल प्रतियोगी परिक्षाओं में पूछे जाते हैं। हम आपको उपर दिए गए मानचित्र में महत्वपूर्ण नदियों को दर्शाये हुए है, जिसे आपको समझने में बहुत आसानी होगी। 

ध्यान देने वाली बातें :-

आप यहां ऊपर मैप में देखेंगे तो आपको सिंधु नदी जो की हिमालय उस पार से आती हुयी दिख रही होगी, वो नदी मानसरोवर झील से निकलती है। सिंधु नदी जैसे ही तिब्बत को पार करके भारत में पहुँचती है ,तो वो लद्दाख से होते हुए POK के रास्ते पाकिस्तान में प्रवेश करती है। सिंधु नदी की ही सहायक नदी झेलम नदी जम्मू कश्मीर से निकलकर चिनाब में मिल जाती है ,इसके आगे रावी नदी भी हिमाचल प्रदेश से निकलकर आएगी चिनाब में मिल जाती है। आगे सतलज जो की हिमालय उस पार से निकलती है वो भारत के हिमाचल प्रेदश तथा पंजाब के रास्ते पाकिस्तान में चिनाब से जाकर मिल जाती है। अंत में चिनाब नदी जो की सिंधु की सबसे बड़ी सहायक नदी है ,वो जाकर सिंधु में मिल जाती है। सिंधु अपना जल अरब सागर में गिरा देती है।

● मुख्य नदी - यह किसी पर्वत ग्लेशियर या झील से निकलती है और ढाल के अनुरूप बहती है। और मार्ग में बहुत गहरी होती है।

● सहायक नदी - यह मुख्य नदी में आकर मिलने वाली छोटी नदियाँ होती है। ये कम गहरी होती है।

● नदी तंत्र - मुख्य नदी तथा उसके सहायक नदी को मिलाकर नदी तंत्र बनता है।

● बेसिन/द्रोणी - किसी नदी तंत्र द्वारा जहाँ तक सिंचाई किया जाता है उसे द्रोणी या बेसिन कहते हैं।

● सबसे बड़ा बेसिन - 

(i) गंगा

(ii) सिंधु 

(iii) गोदावरी 

(iv) कृष्णा 

(v) ब्रह्मपुत्र 

(vi) महानदी,

(vii) नर्मदा

भारत की नदियों को हम दो भागों में बाँटकर पढ़ेंगे-

1. हिमालय की नदियाँ 

2. प्रायद्वीप भारत की नदियाँ 

1. हिमालय की नदियाँ -

हिमालय की नदियों को तीन भागों में बांटा गया है जिसे हम तंत्र कहते है - सिंधु नदी तंत्र, ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र, गंगा नदी तंत्र। 

2. प्रायद्वीप भारत की नदियाँ -

इसे हम दो भागों में बांट सकते है - (1) बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदी, (2) अरब सागर में गिरने वाली नदी। 

सिंधु नदी तंत्र -

1. सिंधु नदी  - यह तिब्बत के मानसरोबर झील से निकलती है। कश्मीर होते हुए पाकिस्तान होते हुए अरब सागर में मिल जाती है। सिंधु जल समझौता के 1960 के तहत सिंधु तंत्र के दो नदी झेलम तथा चिनाव का भारत केवल 20% जल प्रयोग करेगा।

2. झेलम नदी - कश्मीर के शेषनाग झील से निलती है ओर भारत पाकिस्तान की सीमा बनाते हुए चिनाब में मिल जाती है।

3. चिनाब नदी - हिमालच प्रदेश से निकलकर कश्मीर होते हुए सिंधु नदी में मिल जाती है। सिंधु की सबसे बड़ी सहायक नदी है। 

4. रावी नदी - हिमाचल प्रदेश से निकलकर पंजाब होते हुए चिनाब नदी में मिल जाती है।

5. व्यास नदी - हिमाचल प्रदेश से निकलकर सतलज में मिल जाती है।

6. सतलज नदी - मानसरोवर झील से निकलकर शिपकिला दर्रा होते हुए भारत में प्रवेश करती है और चिनाव में मिल जाती है।

ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र -

1. ब्रह्मपुत्र नदी - इसका उद्गम मानसरोवर झील से होता है। तिब्बत में इसे सांगपो, अरुणाचल प्रदेश में दिहांग, असम में ब्रह्मपुत्र बंग्लादेश में जमुना, गंगा में मिलने के बाद मेघना हो जाती है।

2. दिहांग नदी - ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी है।

3. लोहित - ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी है। इसे खूनी नदी भी कहते हैं।

4. सुबनसिरी - ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी है।

5. बराक - ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी है।

6. तिस्ता - ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी है।

गंगा नदी तंत्र -

1. गंगा - भारत की सबसे लम्बी नदी 2525 km है। इसमें बैक्टीरियाफेज जीवाणु पाया जाता है जो हानिकारक जीवों को खा जाता है। उदगम तथा पश्चिम बंगाल में इसे भागीरथी कहते हैं। गंगा नदी को 2008 में राष्ट्रीय नदी घोषित कर दिया गया। गंगा के डॉल्फिन को भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया।

2. यमुना - बंदरपुछ हिमालय से निकलती है। सबसे लम्बी सहायक नदी है।

3. लूनी - यह अरावली के पूर्वी ढाल से निकलकर चम्बल में मिल जाती है।

4. बनास - यह अरावली के पूर्वी ढाल से निकलकर चम्ब्ल में मिल जाती है।

5. चम्बल (सहायक-क्षिप्रा) - विध्यांचल के उत्तरीढाल से निकलकर यमुना में मिल जाती है।

6. काली सिन्ध - चम्बल की सहायक नदी है।

7. सिन्ध - यमुना की सहायक है।

8. बेतवा - यमुना की सहायक है।

9. केन - यमुना की सहायक है।

10. सोन- अमरकंटक से निकलकर उत्तर की ओर पटना के समीप गंगा में मिल जाती है।

गंगा नदी दो देशों से गुजरती है- भारत एवं बंग्लादेश । गंगा नदी भारत के पाँच राज्यों से गुजरती है - उत्तराखण्ड - उत्तर प्रदेश - बिहार झारखण्ड पश्चिम बंगाल

11. रिहन्द - सोन की सहायक है।

12. दामोदर - झारखण्ड से निकलकर हुगली नदी में मिल जाती है। भ्रसघाटी में बहती है। इसे बंगाल का शोक कहते हैं।

13. स्वर्ण रेखा - यह झारखण्ड की प्रमुख नदी है जो बंगाल की खाड़ी में गीर जाती है।

14. बराकर नदी - यह झारखण्ड की प्रमुख नदी है।

15. हुगली - गंगा की एक शाखा है जो बंगाल की खाड़ी में गिर जाती है।

16. महानन्दा - सिक्किम से निकलकर गंगा में मिल जाती है।

17. कोशी - नेपाल में इसे सप्तकोशी कहते हैं। कटिहार के कुर्सेला में गंगा में मिल जाती है। विश्वासघाती नदी, बिहार का शोक नदी है। 

18. गण्डक - नेपाल से निकलकर सोनपुर में गंगा में मिल जाती है।

19. घाघरा (सरयु) - नेपाल से निकलेकर छपरा में गंगा से मिल जाती है। इसे सरयुग भी कहते हैं।

20. सारदा - घाघरा की सहायक नदी है।

21. रामगंगा - कुमायूं हिमालय से निकलर कनौज में गंगा में मिल जाती है इसके तट पर कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान है।

22. साबरमती - अरावली के दक्षीणी भाग में निकलती है। सबसे प्रदूषीत नदी है। 

23. माही - कर्क रेखा को दो बार काटती है।

24. नर्मदा - अमरकंटक से निकलकर पश्चिमकी ओर भ्रंसघाटी से बहती हुई अरब सागर में गिर जाती है। यह डेल्टा न बनाकर स्चुरी बनाती है।

25. ताप्ती - पश्चिम की ओर भ्रंसघाटी में बहते हुए स्चुरी बनाती है और अरब सागर में गिर जाती है।

26. महानदी - अमरकंटक से निकलकर पूरब की ओर बंगाल की खाड़ी में गिर जाती है।

27. गोदावरी - नासिक से निकलकर बंगाल की खाड़ी में गिर जाती है इसे दक्षीणी या बुढ़ी गंगा कहते हैं।

28. पेनगंगा - गोदावरी की सहायक है। 

29. वर्धा - गोदावरी की सहायक है। 

30. इन्द्रावती - गोदावरी की सहायक हैं। 

31.भीमा - गोदावरी की सहायक है। 

32. कृष्णा -  यह महाराष्ट्र के महाबलेश्वर से निकलती है तथा बंगाल की खाड़ी में गिर जाती है।

33. तुगंभद्रा - यह कृष्णा की सहायक है। इसके उत्तर में विजयनगर की राजधानी हम्पी है।

34. कावेरी - कर्नाटक के ब्रह्मगिरी पर्वत से निकलती है। बंगाल की खाड़ी में गिर जाती है। कावेरी जल विवाद कर्नाटक तथा तमिलनाडु के बीच है। इसक दक्षिण भारत की गंगा भी कहते हैं।

35. पेरियार - केरल की नदी जो पश्चिम में जाती है।

36. बैगाई - भारत की सबसे दक्षीणी नदी हैं।


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अंतिम शब्द  -

दोस्तो उम्मीद करता हूं कि आप सभी को "Indian Geography - Complete Notes Of Indian Geography Part 03 - Indian Geography UPSC Notes Topic Wise" पसंद आया होगा, अगर पसंद आया हो तो प्लीज शेयर ज़रूर करियेगा। आपको ऊपर दिए गए नोट्स में कहीं भी गलत दिखे तो हमे कमेंट्स में जरूर बताए। 

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